आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नेक्स्ट लेवल: आवाज रिकॉर्ड कर कंपनियां आपका मूड, व्यक्तित्व और भावनाएं भांप लेंगी, यह डेटा उनके लिए कमाई का एक नया रास्ता खोलेगा

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  • By Recording Your Voice, Companies Will Sense Your Mood, Personality And Emotions, This Data Will Open A New Way Of Earning For Them

न्यूयॉर्कएक घंटा पहले

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जब भी आप किसी जानकारी या शिकायत के लिए किसी कंपनी के कॉल सेंटर में बात करते हैं तो कॉल सेंटर के कर्मचारी आपसे कहते हैं कि ट्रेनिंग और क्वालिटी कंट्रोल के उद्देश्य से इस कॉल को रिकॉर्ड किया जा रहा है। हकीकत यह है कि आपकी आवाज से कंपनियां भविष्य में फायदा कमा सकती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अगले मुकाम पर पहुंचाने के में भी इसकी अहम भूमिका है।

कॉल सेंटर ही नहीं स्मार्ट स्पीकर और स्मार्टफोन जैसी डिवाइस भी आपकी आवाज और उसके उतार-चढ़ाव को कैप्चर करने में जुटे हुए हैं। भविष्य में आपकी आवाज भी आपकी बायो मीट्रिक पहचान बन सकती है।

पर्सनलाइज्ड सेलिंग से जुड़े हुए व्यवसाय जिसमें कुछ बड़े ब्रांड शामिल हैं, इस दिशा में काम कर रहे हैं कि आपकी आवाज के जरिए किस तरह भावनाओं को पहचाना जा सके और उसके मुताबिक डील की जा सके।

मिसाल के तौर पर आप किसी बड़े रेस्त्रां में सीट रिजर्व करने के लिए फोन करते हैं लेकिन उसका वॉयस एनालिसिस सिस्टम आपकी आवाज के जरिए यह निष्कर्ष निकालता है कि आप उनके रेस्त्रां में डिनर करने वाले लोगों की श्रेणी में नहीं आते और आपका अनुरोध अस्वीकार कर दिया जाता है। या फिर कोई स्कूल किसी छात्र का स्पेशल कोर्स में प्रवेश इसलिए नकार देता है क्योंकि वॉयस एनालिसिस में पता चलता है कि वह छात्र उस विषय को लेकर गंभीर नहीं है।

कस्टमर एजेंट से बातचीत के दौरान यह बायो मीट्रिक टेक्नोलॉजी आपको तनावग्रस्त बताती है तो हो सकता है कि खरीद पर कुछ अतिरिक्त डिस्काउंट मिल जाए, खासतौर पर तब जब कंपनी के रिकॉर्ड में आप अधिक खर्च करने वाले के रूप में दर्ज हैं। जल्द ही कंपनियां आपकी आवाज के जरिए वजन, ऊंचाई, उम्र, नस्ल जैसी कई बातों का पता लगा पाने में सक्षम होंगी। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि आवाज के जरिए इस तरह की चारित्रिक विशेषताओं का पता लगाया जा सकता है।

गूगल की नई टेक्नोलॉजी उम्र और लिंग का भी अनुमान लगा लेती है
वॉयस सिग्नेचर के आधार पर पेटेंट की गई गूगल सर्किटरी उम्र और लिंग का अनुमान लगाती है। माता-पिता अपने बच्चों की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। अमेजन का दावा है कि उसके हेलो रिस्ट बैंड दूसरों के साथ बातचीत के दौरान आपकी भावनात्मक स्थिति को पहचान सकते हैं।

कई होटलों ने अपने रूम में अमेजन और गूगल डिवाइस लगाई हैं। कंस्ट्रक्शन कंपनियां भी नए घरों के निर्माण में अमेजन की एलेक्सा और गूगल असिस्टेंट को दीवारों में फिट कर रही हैं। हालांकि इन सब उपायों से कई सामाजिक और निजता से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं जिनका जवाब पहले खोजना जरूरी है।

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