एक्टर-प्रोड्यूसर के तौर पर डीनो का कमबैक: डीनो मोरिया ने कहा-सालों से मैं ऐसे ही नहीं बैठा था, अपने आप को इस पल के लिए तैयार कर रहा था

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मुंबई4 मिनट पहलेलेखक: मनीषा भल्ला

  • सीखने की चाह ऐसी कि 15 फिल्में कर लीं, एक फिल्म भी प्रोड्यूस की और बाद में जॉइन किया एक्टिंग स्कूल
  • शेबानी खान बनने के लिए डीनो मोरिया ने ब्लैक पैंथर के वीडियोज देखे थे

मॉडल और रोमांटिक हीरो के तौर पर पहचाने जाने वाले एक्टर डीनो मोरिया ने वेब सीरिज ‘द एम्पायर’ में ‘मुहम्‍मद शेबानी’ के किरदार में वापसी की है। हाल ही में डीनो की बतौर प्रोड्यूसर फिल्म ‘हेलमेट’ भी रिलीज हुई है। डीनो ने अपने कमबैक के संघर्ष और ‘द एम्पायर’ के रोल की तैयारी को लेकर ‘दैनिक भास्कर’ से खास बात चीत की है।

मुहम्‍मद शेबानी की बहुत चर्चा हो रही है
मैं बहुत खुश हूं। मुझे बहुत अच्छे फीडबैक मिल रहे हैं। इस समय का मैं बहुत सालों से इंतजार कर रहा था।

क्या स्कूल में हिस्ट्री आपको पसंद थी ?
हां, एक सब्जेक्ट के रूप में हिस्ट्री के चैप्टर मैं पसंद करता था। पुराने राजाओं, बादशाह, मुगल, युद्ध आदि के बारे में जानने-सीखने को मिला था। देश का इतिहास जानने का मौका मिला। फिर मैंने किताबों से बहुत कुछ पढ़ा और सीखा है।

आपके करियर हिस्ट्री में क्या सबसे रोमांचकारी और क्या बोरिंग था ?
मैं शायद 17-18 साल का था, जब मॉडलिंग शुरू की थी। ग्लैडरैग्स मॉडल कंपटीशन जीता था। 60 देशों के बीच हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कामयाब हुआ था। फिर मैं मुंबई आया। पहली फिल्म ‘प्यार में कभी-कभी’ आई और बाद में राज, यह सब बहुत एक्साइटिंग था। मेरी जिंदगी में कभी कुछ बोरिंग नहीं हुआ। क्योंकि, मैं हर दिन हर हफ्ते कुछ न कुछ नया और इंटरेस्टिंग करता हूं। एक्टिंग, प्रोडक्शन और हाल ही में जो बिजनेस शुरू किया है। मैं बहुत एंबिशियस हूं। बोरिंग हो ही नहीं सकता ।

आपने पहले फिल्में की, बाद में एक्टिंग स्कूल गए, ऐसा क्यों?
साल 2011 तक मैंने करीब 15 फिल्में की। बाद में ‘जिस्म 2’ से प्रोड्यूसर भी बना। यहां कंफ्यूजन हुआ कि एक्टर के तौर पर आगे बढ़ना या प्रोड्यूसर के तौर पर। मेरा पहला प्यार तो एक्टिंग ही है। और ‘जिस्म 2’ प्रोड्यूस करते-करते रणदीप हुड्‌डा को देखकर मुझे ख्याल आया कि अभी मेरी एक्टिंग में कुछ कमियां हैं। क्योंकि मैंने कभी इसकी फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली थीं।

किसी ने बताया कि दिल्ली में पंडित जी, एन के शर्मा बहुत फेमस एक्टिंग टीचर हैं। मैंने उनसे बात कि तो वह बोले कि आप तो बहुत सारी फिल्में कर चुके हैं। मैंने कहा कि फिर भी मैं कुछ नया सीखना चाहता हूं। फिर मैं सबकुछ छोड़कर एक साल के लिए दिल्ली चला गया। वहां मैंने काफी कुछ नया सीखा।

आपकी वापसी कैसी रही ?
एक साल के बाद वापस आकर मैंने हर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के दरवाजे पर दस्तक दी कि मुझे काम दो। लेकिन, अफसोस है कि मुझे मेरे मन माफिक ऑफर नहीं मिला था। मैंने तय किया कि जब तक अच्छा मौका नहीं मिलेगा, मैं काम नहीं करुंगा। लेकिन, मैं हर दिन प्रेक्टिस करता था। अपने ऊपर बहुत काम किया। काम करना बंद नहीं किया। मन में यह बात थी कि अच्छा काम या अच्छी स्क्रिप्ट मिले तब मैं तैयार रहूं। बस, इंतजार करता रहा।

निगेटिविटी नहीं आई इस दौरान?
छोटे मोटे रोल ऑफर होते थे। सोचता था कि यह करूं या ना करूं। इंडस्ट्री में लोगों को मालूम तो होना चाहिए कि मैं अभी मौजूद हूं, जिंदा हूं। आउट ऑफ द साइट, आउट ऑफ द माइंड नहीं होना था। पर मैं डटा रहा कि मुझे ऐसे वैसे रोल नहीं चाहिए। अच्छे रोल का इंतजार करूंगा। आपको भूख है और आप पॉजिटिव रहते हैं तो यूनिवर्स आपको भर-भर कर देता है, लेकिन वो भूख और मेहनत चाहिए।

शेबानी खान के रूप में ढलने के लिए आपने क्या तैयारी की ?
पहली बात कि मैंने 25-30 बार स्क्रिप्ट पढ़ी। वो दुनिया समझना, हर किरदार की साइकोलॉजी समझना जरूरी था। एक और प्रोसेस है मेरा, मैं जब भी कोई रोल करता हूं, उस किरदार की तुलना किसी जानवर से करता हूं। क्योंकि, हर जानवर में कुछ न कुछ ऐसा होता है जिसे मैं कॉपी कर सकता हूं।

डायरेक्टर ने बताया कि शेबानी खान एक ब्लैक पैंथर सा है। यूट्यूब पर काफी देखा कि ब्लैक पैंथर कैसे चलता है, कैसे आवाज करता है, दिखने में बहुत खूबसूरत है। लेकिन, उसमें एक पागलपन रहता है। कभी पता नहीं रहता कि वह तुम पर अटैक करेगा या सिर्फ पास से गुजर जाएगा। एक और प्रोसेस थी। मैं किरदार और सीन को लेकर अपने दिमाग में बैकग्राउंड म्यूजिक सुनता रहता था। जैसे ही सीन शुरू होता था, वह म्यूजिक मेरे दिमाग में बजने लगता था और मैं मोड में आ जाता था।

एक रोमांटिक एक्टर इतना क्रूर कैसे बन पाया ?
इस किरदार ने मेरी वर्सेटिलिटी साबित की है। मैंने यह कैरेक्टर के बारे में सुनते ही कहा कि मुझे यही करना है, क्योंकि मेरी ऑडियंस ने मुझे कभी इस रूप में नहीं देखा है। ऐसे किरदार में आप हंस सकते हैं, पागल हो जाते हैं, लोग यकीन करेंगे कि यह वाकई पागल है। जबकि पॉजिटिव कैरेक्टर में बहुत लिमिटेशन होती हैं। निगेटिव किरदार निभाना सही में एक मौका था।

शेबानी खान एक अनजान किरदार है, यह कैसे फायदेमंद रहा?
इतिहास में शेबानी को कम लोग जानते है। यह सीरीज बाबर के भारत आने से पहले की लाइफ की है। इसे हम इतिहास में नहीं पढ़ते हैं। मैं मानता हूं कि जैसे मैंने शेबानी को पेश किया, तो लोग याद रखेंगे कि शेबानी एक शख्सियत था और डीनो ने इस रोल किया था ।

आप शेबानी खान में ट्रांसफॉर्मेशन भी ले आए ?
यह मेरी तारीफ है, लेकिन उसका श्रेय मेरी डायरेक्टर मिताक्षरा को जाता है। शेबानी खान बड़ा खूंखार आदमी है, लेकिन उसका खुद का एक इतिहास है। उसके बचपन के कुछ किस्से थे। कोई चाहे कितना खतरनाक इंसान हो, लेकिन जब मोहब्बत होती है तो वह बदल जाता है। मोहब्बत में ताकतवर भी कमजोर बन जाता है। उसमें जीने के चाह पैदा होती है। सिरीज के पांचवे एपिसोड में यह बहुत ही बढ़िया तरीके से पेश किया गया है।

बतौर प्रोड्यूसर आगे क्या प्लान है ?
‘द एम्पायर’ रिलीज हुई उसके एक हफ्ते बाद बतौर प्रोड्यूसर मेरी फिल्म ‘हेलमेट’ रिलीज हुई, अच्छी चल रही है। आगे मैं दर्शकों को बेहतरीन कहानियां दिखाना चाहता हूं। बतौर प्रोड्यूसर सब आपकी जिम्मेदारी होती है। कहानी, एक्टर, लोकेशन, बजट, डायरेक्टर यह सब पूरा करने में समय लगता है। मेरे पास कुछ कहानियां हैं। कुछ वेब सीरीज के तौर पर और कुछ फिल्म के तौर पर पिच कर रहा हूं।

और कोई ड्रीम रोल ?
मैं चाहता हूं कि बेहतरीन एक्शन फिल्म करूं। विश्वास के साथ कह सकता हूं कि मैं इसमें कमाल का काम कर सकता हूं।



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