भारतीयों को मिल सकती है राहत: अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए नए बिल की तैयारी, फीस देकर नागरिकता का रास्ता खुल सकेगा

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वॉशिंगटन7 मिनट पहले

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कई साल से अमेरिकी नागरिकता देख रहे लोगों के लिए कुछ राहत भरी खबर है। अमेरिकी संसद एक ऐसे बिल पर विचार कर रही है कि जिसमें ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लोगों को तय फीस और कुछ शर्तें पूरी करने के बाद नागरिकता मिल सकेगी। हालांकि, बिल अभी बिल्कुल शुरुआती दौर में है। इसकी प्रक्रिया में काफी वक्त लग सकता है। ग्रीन कार्ड का बैकलॉग बहुत लंबा होता है और लाखों लोग खासकर आईटी प्रोफेशनल्स इसका शिकार बनते हैं। उन्हें बार-बार अपना वर्क वीजा रिन्यू कराना होता है।

यह बिल उस रीकन्सीलिएशन पैकेज का हिस्सा है जो हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया गया है। ग्रीन कार्ड को परमानेंट रेसीडेंट कार्ड भी कहा जाता है। यह इमीग्रेंट्स यानी अप्रवासियों के लिए जारी किया जाता है।

ज्यूडिशियरी कमेटी ने दी जानकारी
बिल पर हाउस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की ज्यूडिशियरी कमेटी विचार कर रही है। इमीग्रेशन संबंधी मामलों पर फैसले यही कमेटी लेती है। कमेटी द्वारा जारी लिखित बयान के मुताबिक, ग्रीन कार्ड के लिए आवेदनकर्ता को 5 हजार डॉलर की सप्लीमेंटल फी यानी पूरक राशि देनी होगी। फोर्ब्स मैग्जीन ने इसकी जानकारी दी है। अगर कोई अमेरिकी नागरिक किसी इमीग्रेंट को स्पॉन्सर करता है तो इन हालात में फीस आधी यानी ढाई हजार डॉलर हो जाएगी। अगर एप्लीकेंट की प्रॉयोरिटी डेट दो साल से ज्यादा है तो यह फीस 1500 डॉलर होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह फीस बाकी प्रोसेसिंग फीस से अलग होगी। दूसरे शब्दों में कहें तो यह फीस अलग से देनी होगी और प्रोसेसिंग में लगने वाला खर्च अलग होगा।

ज्यूडिशियरी कमेटी जिस बिल पर विचार कर रही है, उसमें फीस के अलावा कई और शर्तें भी जोड़ी गई हैं।

ज्यूडिशियरी कमेटी जिस बिल पर विचार कर रही है, उसमें फीस के अलावा कई और शर्तें भी जोड़ी गई हैं।

प्रक्रिया लंबी चलेगी
ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिकी सरकारों का रुख बदलता देखा गया है। डोनाल्ड ट्रम्प के दौर में तो वर्क वीजा ही मुश्किल हो गए थे। ट्रम्प का कहना था कि कंपनियों की पहली प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों को नौकरी देना होना चाहिए। जो बाइडेन ने इसका विरोध किया था और सुधारों का वादा किया था। हालांकि, इस मसले पर उन्हें भी अब तक कोई कामयाबी नहीं मिली है।

अगर इस बिल की ही बात करें तो यह साफ है कि इसके पास होने में काफी वक्त लग सकता है। अभी तो ज्यूडिशियरी कमेटी ही इस पर विचार कर रही है। फिर इस पर दोनों सदनों में लंबी बहस चलेगी। कई प्रस्ताव आएंगे और फिर इन पर बहस होगी। अगर ये सब निपट जाता है तो फिर आखिरी फैसला राष्ट्रपति करेंगे। उनके दस्तखत के बाद ही बिल कानून बन पाएगा।

कुछ और लोगों को भी फायदा
CBS न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह बिल पास हो जाता है तो उन लोगों को भी फायदा होगा जो बहुत कम उम्र में अमेरिका आए थे और जिनके पास इमीग्रेशन डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं। खेती या कोविड के दौरान अति आवश्यक सेवाओं मे काम करने वाले लोग भी इसका फायदा उठा सकेंगे। कुछ लोगों का कहना है कि इस बिल से भारतीयों और चीनी नागरिकों को ज्यादा फायदा होगा। हालांकि, कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि इस बिल से अप्रवासियों को एक ही जैसे फ्रेमवर्क में लाया जा सकेगा।

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