यूरोप का हाल बेहाल: जर्मनी में 1000 साल की भीषण बाढ़; ग्रीन हाउस गैसों के कारण यूरोप का यह हाल, बारिश और भूस्खलन से सबसे ज्यादा नुकसान जर्मनी में

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5 घंटे पहले

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एक गर्म वातावरण अधिक नमी सोखता है। इससे अधिक से अधिक बारिश होती है।

जर्मनी में भीषण बाढ़ से अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 1500 लोग लापता हैं। मौसम विभाग के एक अध्ययन में कहा गया है कि जर्मनी, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और नीदरलैंड्स में भारी बारिश के कारण जलवायु में बदलाव है। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण जलवायु बदल रही है। भारी बारिश इसी उत्सर्जन का ताजा नतीजा है। एक गर्म वातावरण अधिक नमी सोखता है। इससे अधिक से अधिक बारिश होती है।

यही नहीं, पश्चिम अमेरिका के जंगलों में आग, कैरेबियन द्वीप में तूफान का कारण भी जलवायु में बदलाव है। उधर, ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग में हाइड्रोमेटोरोलॉजिस्ट डॉ. लिंडा स्पाइट ने कहा कि जर्मनी में भारी बारिश में इतनी मौतें नहीं होनी चाहिए थी। लेकिन उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन में कमी के कारण इतनी जानें गईं।

जर्मन मौसम विज्ञान विभाग के प्रवक्ता उवे किर्सचे ने कहा कि जर्मनी में ऐसी बाढ़ पिछले 1000 साल में कभी नहीं देखी गई होगी। इस आपदा से भारी नुकसान हुआ है। हमने कभी देश की छोटी नदियों में ऐसी भीषण बाढ़ नहीं देखी। इसलिए इससे बचने की तैयारी भी नहीं की जा सकी। कई क्षेत्रों में अधिकारियों और लोगों ने कहा कि वे जब तक बाढ़ से बचने के उपाय करते, तब तक नदियों में धाराएं बदल गईं। बाढ़ में पुल, घर और वाहन बह गए।

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