रोम-रोम में जश्न: इटली पेनल्टी में जीतकर 53 साल बाद यूरो कप विजेता, इंग्लैंड में 55 साल से चैंपियन ट्रॉफी का सूखा बरकरार

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लंदन21 मिनट पहले

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खेला यूं हुआ: इतालवी कप्तान चिएलिनी ने इंग्लैंड के साका को गोल करने से रोकने के लिए गिरा दिया। फिर भी उन्हें यलो कार्ड ही मिला। ये गोल होता तो इंग्लैंड जीत जाता।

2018 के वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई न कर पाने वाला इटली यूरो कप का विजेता रहा। रविवार रात फाइनल में इंग्लैंड और इटली 1-1 से बराबरी पर रहे तो मैच एक्स्ट्रा टाइम में पहुंचा। उसमें भी गोल नहीं हो सका, तो पेनल्टी शूटआउट हुआ। इटली के डोमेनिको बेरार्डी, लियोनार्डो बोनुची और फेडेरिको बर्नार्डेस्की ने गोल किए।

इंग्लैंड के हैरी केन और हैरी मैग्वायर ने एक-एक गाेल दागे। तीसरी पेनल्टी लेने आए रैशफोर्ड की शॉट गोलपोस्ट से टकरा गई, जबकि सांचो और साका के शॉट को इटली के गोलकीपर जियानलुइगी डोनारुम्मा ने रोक लिया। यही निर्णायक साबित हुआ और इटली 3-2 से जीत गया। इटली की जीत के बाद राजधानी राेम में जश्न का माहौल है। लंदन में मायूसी छाई हुई है।

इटली के ये सबक जीवन पर भी लागू होते हैं

1. अनुभव: अनुभव नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इटली की टीम में बोनुची 34 और चिएलिनी 36 साल के हैं। दोनों ने डिफेंडर के तौर पर साबित किया कि युवा खिलाड़ियों पर उनका अनुभव भारी रहा।

2. लीडरशिप: कोच राबर्टों मनीची ने 2018 में कमान संभाली। इससे छह माह पहले ही टीम वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थी। मनीची के नेतृत्व में टीम निखरी। अब सर्वश्रेष्ठ टीम में से एक है।

इटली की विजयी रणनीति को यूं समझिए

  • फुटबॉल 65% समय इटली के पास रही। इंग्लैंड 35% समय ही रख पाई।
  • इटली के पास 88% सटीक रहे। इंग्लैंड के पास 74% ही सटीक रहे।
  • इटली ने 19 शॉट लगाए, 6 निशाने पर लगे। इंग्लैंड का स्कोर 6/2 रहा।

इटली ने 1968 के बाद पहली बार यह खिताब जीता। इंग्लैंड 1966 के वर्ल्ड कप के बाद बड़ा खिताब नहीं जीत पाई। उसने 1990, 96, 98, 2004, 2006, 2012 में बड़े टूर्नामेंट भी पेनल्टी शूटआउट में गंवाए।

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