वॉइस ओवर से आवाज की हूबहू कॉपी तैयार: 15 भाषाओं में अनुवाद व भावनाएं बदलना संभव, कई जगह भेज सकेंगे,वॉइसओवर आर्टिस्ट व अभिनेताओं को टेक्नोलॉजी पसंद, पर खतरे भी

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वॉशिंगटनएक घंटा पहले

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इस कंपनी की कर्ताधर्ता रूपल पटेल हैं। वे नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशन साइंस एंड डिस्ऑर्डर्स की प्रोफेसर भी हैं।

जब टेक्सास के 33 साल के वॉइसओवर आर्टिस्ट और कलाकार टिम हेलर ने अपनी क्लोन आवाज सुनी तो वे सन्न रह गए। वे बताते हैं कि हबहू मेरे ही जैसी आवाज सुनकर मेरा दिमाग हिल गया था। टिम कार्टून कैरेक्टरों को आवाज देना, ऑडियो बुक और डाक्यूमेंट्री सुनाना और वीडियो गेम पर आवाजें देना जैसी जिम्मेदारियां निभाते हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी आवाज की क्लोनिंग करवाई है। हेलर कहते हैं कि इससे उन्हें ज्यादा काम हासिल करने में मदद मिलेगी।

हेलर ने वॉइस क्लोनिंग बोस्टन की कंपनी वोकलिड कंपनी से करवाई है। इस कंपनी की कर्ताधर्ता रूपल पटेल हैं। वे नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशन साइंस एंड डिस्ऑर्डर्स की प्रोफेसर भी हैं। दरअसल, उनकी यह टेक्नोलॉजी उस क्लीनिकल वर्क का विस्तार है, जो उन्होंने मरीजों की मदद के लिए शुरू किया था, जिनकी आवाज सर्जरी या बीमारी के बाद चली गई हो और वे बिना मदद के अपनी बात किसी से कह नहीं पाते।

प्रो. पटेल बताती है कि ये टेक्नोलॉजी एआई आधारित है। इसमें ऐसा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया गया है जो खुद सीखने के साथ अनुकूलित हो सकता है। वॉइस क्लोनिंग के जरिए अभिनेताओं की आ‌वाज कई भाषाओं में अनुवाद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए अमेरिकी फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्म विदेश में भेजना हो तो अतिरिक्त डबिंग आर्टिस्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी।

कनाडा की रेसेम्बल एआई के सीईओ जोहेब अहमद का कहना है कि उनका सॉफ्टवेयर आवाज को 15 भाषाओं में ट्रांसलेट कर सकता है। साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट एडी बॉबरिट्स्की का कहना है कि साइबर अपराधी गलत फायदा उठा सकते हैं। 2019 में ब्रिटेन में एक बैंक मैनेजर को उसके जर्मन बॉस की क्लोन आवाज के जरिए धोखा देकर 1 करोड़ रुपए ट्रांसफर करा लिए गए थे।

मूल आवाज की लय, पिच, गति और प्रवाह भी पकड़ लेता है सॉफ्टवेयर

वॉयस क्लोनिंग टेक्नोलॉजी में किसी शख्स की आवाज की कृत्रिम और अनुकूलित कॉपी बनाई जाती है। अब तो यह टेक्नोलॉजी इतनी उन्नत हो गई है कि सॉफ्टवेयर न केवल उच्चारण बल्कि लय, बोलने का प्रवाह यहां तक कि सांसें भी पकड़ लेता है। प्रो. पटेल बताती हैं कि इसे किसी विशेष भावना जैसे क्रोध, डर, खुशी, स्नेह और ऊब आदि को दर्शाने के लिए बदला भी जा सकता है। इसलिए इसने सभी का ध्यान खींचा है।

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