सामने आया नॉर्थ इंडिया का अपनी तरह का पहला केस: जर्मनी में बैठी महिला ने नाभा के युवक का वॉलेट किया हैक, 30 लाख की डिजिटल करंसी चुराई; मुख्य आरोपी तक पहुंची साइबर सैल

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नाभा(पटियाला)/राकेश कुमारएक घंटा पहले

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नॉर्थ इंडिया के पहले डिजिटल करेंसी फ्रॉड मामले के तथ्य खंगालते साइबर क्राइम सैल इंचार्ज प्रीतपाल सिंह।

अगर आप अपने डिजिटल वॉलेट में करेंसी रखते हैं या इस तरह की कोई ट्रांजेक्शन करते हैं तो सावधान हो जाइए। साइबर चोर आपकी मेहनत की कमाई को पलक के फौर में जीरो कर सकते हैं। फिलहाल नाभा में नॉर्थ इंडिया का अपनी तरह का पहला मामला सामने आया है, जिसमें एक युवक के वॉलेट से 30 लाख की डिजिटल करेंसी चोरी हो गई है। इस केस को सुलझाते हुए पंजाब पुलिस की साइबर क्राइम सैल न सिर्फ मुख्य आरोपी तक जा पहुंची, बल्कि कई लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर होने के बावजूद फ्रीज करवा दिए।

दरअसल अतुल सिंगला पुत्र धर्मवीर सिंगला निवासी प्रीत विहार ने अपने एक्सोडस वॉलेट में क्रिप्टो करेंसी के 30 लाख रुपए (एथेरियम के रूप में) जमा कर रखे थे। ये विदेश में रहने वाली महिला ओल्गा रोसतूनोवा और उसके अनजान साथियों ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिये चुरा लिए। अतुल सिंगला की शिकायत के आधार पर थाना कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। शिकायतकर्ता अतुल के मुताबिक वॉलेट में क्रिप्टो करेंसी के 30 लाख रुपए के कॉइन चुरा तो लिए गए, लेकिन उस संबंधी एक अलग तरह का सॉफ्टवेयर होने के कारण ट्रांजेक्शन को लेकर कोई मैसेज नहीं आता। जब उन्होंने अपना बैलेंस चेक किया तो यह देखकर उनके होश उड़ गए।

मामला साइबर क्राइम सैल पटियाला के पास पहुंचा और जांच का जिम्मा इंचार्ज प्रीतपाल सिंह ने संभाला। उन्होंने बारीकी से हर पहलू पर जांच करते हुए इस डिजिटल वॉलेट से की गई हर ट्रांजेक्शन को खंगाला और अपनी तकनीकी टीम के साथ इस केस पर लगातार काम करते हुए पूरे खेल की जर्मनी निवासी मुख्य आरोपी ओल्गा रोसतूनोवा को बेनकाब करते हुए उसके और साथ शामिल आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

साइबर क्राइम सैल इंचार्ज प्रीतपाल सिंह के मुताबिक साल 2003 में एक सॉफ्टवेयर की मदद से अकाउंट बनाकर यह डिजिटल कॉइन लिए गए थे, लेकिन कुछ दिन बाद शिकायतकर्ता ने यह सॉफ्टवेयर डिलीट कर दिया, जिसके बाद साइबर क्राइम से जुड़े अपराधियों ने अकाउंट हैक करके यह कांड कर दिया। फिलहाल जर्मनी की पुलिस से संपर्क करके उसको काबू करने के लिए अगली कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

क्या है डिजिटल करेंसी?
दैनिक भास्कर के पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेट पर कई नए सॉफ्टवेयर आए हैं जिन्हें डाउनलोड कर एक डिजिटल वॉलेट एक अकाउंट की तरह ही बनाया जाता है। उसमें यूजर के पास पासवर्ड होता है और वह क्वाइन की तरह गिने जाने वाली करेंसी की खरीद करते हैं और अपने वैलेट में जमा करते हैं और वह इसका इस्तेमाल दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी चीज की खरीदारी के लिए कर सकते हैं। हालांकि इससे पहले इसी तरह की डिजिटल करेंसी का चलन शुरू हुआ था, लेकिन भारत सरकार ने उसे मान्यता नहीं दी थी जिसके बाद अब यह डिजिटल करेंसी का नया चलन शुरू हुआ।

बरतें ये साावधानी
इस घटना को लेकर अतुल ने एक बड़ी गलती कर दी। उसने सॉफ्टवेयर तो डिलीट कर दिया, लेकिन उसका वॉलेट वैसे ही इंटरनेट पर बना रहा। इसलिए सावधानी बरतते हुए सबसे पहले उस वॉलेट को खाली करते हुए उसे अपने पासवर्ड का इस्तेमाल करते हुए बंद करना चाहिए और उसके बाद ही सॉफ्टवेयर को डिलीट करें।

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